नारनौल | महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल : जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने परखा हस्तशिल्प प्रशिक्षण | कारागार में सुनीं कानूनी समस्याएं

नारनौल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से जिला कारागार में संचालित हस्तशिल्प कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को निरीक्षण किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष डॉ. रितु वाई.के. बहल ने जिला कारागार पहुंचकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का जायजा लिया। इस दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीलम कुमारी भी मौजूद रहीं।
निरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने रिचा क्राफ्ट अटेली के सहयोग से चल रहे एक माह के हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम का अवलोकन किया। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला बंदियों और प्रशिक्षकों से संवाद कर प्रशिक्षण की प्रगति की जानकारी ली।
महिला बंदियों द्वारा तैयार की गई हस्तशिल्प सामग्री का निरीक्षण करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उनकी रचनात्मकता, मेहनत और कला की सराहना की। उन्होंने कहा कि कारागार में सीखा गया यह कौशल भविष्य में उनके पुनर्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन यापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दौरे के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने जिला कारागार में बंदियों के रहन-सहन और उपलब्ध सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। साथ ही महिला बंदियों की कानूनी समस्याओं और अन्य कठिनाइयों को सुनकर उनके त्वरित समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि इस प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है, ताकि कारागार से रिहा होने



