नारनौल | सीमित स्टाफ में भी कमाल: महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग ने एक महीने में किए सैकड़ों टेस्ट

रिपोर्टर: रामचन्द्र सैनी
| नारनौल
महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज
महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज

नारनौल | महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज में स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बावजूद मौजूदा टीम के सकारात्मक प्रयासों से क्षेत्र के मरीजों को राहत मिलती दिखाई दे रही है। सीमित संसाधनों और डेपुटेशन पर आए स्टाफ के सहारे मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को गति देने का प्रयास किया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

6 अप्रैल को प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज परिसर में राव तुलाराम अस्पताल और रेडियोलॉजी विभाग का उद्घाटन किया था। उद्घाटन के बाद ठीक एक महीने के भीतर रेडियोलॉजी विभाग ने उल्लेखनीय कार्य करते हुए मरीजों को बड़ी राहत दी है।

मेडिकल कॉलेज में डेपुटेशन पर अपनी सेवाएं दे रहे रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अनिल यादव तथा विभागीय सहयोगी संजय यादव की टीम ने मात्र एक महीने में 395 एक्स-रे, 220 अल्ट्रासाउंड और 20 सीटी स्कैन किए हैं। सीमित स्टाफ के बावजूद यह आंकड़े स्वास्थ्य सेवाओं की सक्रियता को दर्शाते हैं।

मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. बृजेंद्र सिंह ढिल्लों ने बताया कि बेहद सीमित साधनों में डेपुटेशन पर आए स्टाफ द्वारा दी जा रही सेवाएं अपने आप में मिसाल हैं। उनका कहना है कि रेडियोलॉजी विभाग शुरू होने के बाद मरीजों को जो सुविधाएं मिल रही हैं, उन्हें किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे आसपास के क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिली है।

वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सूत्रों के अनुसार अप्रैल माह के दौरान अन्य विभागों में भी जांचों की संख्या उत्साहजनक रही। बायोकेमिस्ट्री विभाग में 1178 टेस्ट किए गए, पैथोलॉजी लैब में 938 जांचें हुईं, जबकि माइक्रोबायोलॉजी लैब में 145 टेस्ट किए गए। इसके अलावा अप्रैल माह में ओपीडी का आंकड़ा भी 3000 से अधिक पहुंच चुका है।

हालांकि मेडिकल कॉलेज में अभी भी स्थायी स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है, लेकिन मौजूदा टीम द्वारा किए जा रहे प्रयास यह संकेत दे रहे हैं कि संसाधनों की कमी के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम जारी है।

इधर सत्ता पक्ष के तमाम नेताओं से सवाल अब भी बरकरार हैं। यह बात अलग है कि मेडिकल कॉलेज का वर्तमान स्टाफ अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ रहा, लेकिन इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि यदि रेडियोलॉजी विभाग में डेपुटेशन पर यह स्टाफ नहीं होता तो अब तक जिन लोगों को सुविधा मिल रही है, वे भी इससे वंचित रह जाते।

जिले के जनप्रतिनिधियों और सत्ता पक्ष के पदाधिकारियों की उपलब्धि आखिर इसे किस रूप में देखा जाए, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। केवल सीमित जांच सुविधाओं और एक लैब की तरह मेडिकल कॉलेज का संचालन होना अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। मेडिकल कॉलेज में करोड़ों रुपये की एमआरआई मशीन आज भी विशेषज्ञ की नियुक्ति के इंतजार में धूल फांक रही है। वहीं आईपीडी सेवाएं शुरू नहीं होना और बड़े दावों का धरातल पर नजर नहीं आना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि इन परिस्थितियों के लिए सीधे तौर पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि सीमित संसाधनों में मौजूदा स्टाफ लगातार प्रयास कर रहा है। अब आम जनता में यह चर्चा शुरू हो चुकी है कि राजनीति और श्रेय लेने की होड़ से ऊपर उठकर सत्ता पक्ष के छोटे से लेकर बड़े पदाधिकारियों को सरकार की इस सौगात से वास्तविक सरोकार दिखाना होगा। तभी जाकर क्षेत्र की जनता को महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज का पूरा लाभ मिल

Edit By: शिवानी राजपूत
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