अटेली । एक हादसे ने बदली सोच : 33 वर्षों में 36 बार किया रक्तदान | बाबू प्रहलाद बने मानवता की मिसाल

रिपोर्टर: जितेंद्र सोलंकी
| अटेली
बाबू प्रहलाद सिंह
बाबू प्रहलाद सिंह

अटेली । गांव बिहाली निवासी बाबू प्रहलाद सिंह सिर्फ एक नाम नहीं, 36 बार जीवन बांटने का संकल्प है। बाबू प्रहलाद सिंह की यह कहानी बताती है कि इंसानियत का एक फैसला कैसे 33 साल तक अनगिनत परिवारों की उम्मीद बन सकता है।

बाबू प्रहलाद सिंह ने 1992 में गुरुग्राम की सड़क पर हुए एक हादसे में घायल व्यक्ति के लिए पहली बार रक्तदान कर रक्तदान की ताकत से परिचित हुए । तब से हर बूंद खून उनके लिए किसी की पूरी जिंदगी है। उस दिन नौकरी के दौरान उनकी आंखों के सामने साइकिल सवार नेपाली युवक का भीषण एक्सीडेंट हुआ। बाबू प्रहलाद सिंह उसे फौरन अस्पताल ले गए। युवक का काफी खून बह चुका था और डॉक्टरों ने तुरंत रक्त मांगा। बिना एक पल गंवाए उन्होंने पहली बार रक्तदान किया। बाबू प्रहलाद सिंह ने बताया कि पहली बार रक्तदान करने के बाद समझ आया कि मेरी एक यूनिट किसी का पूरा संसार बचा सकती है । 3 मार्च 1970 को जन्मे 56 वर्षीय बाबू प्रहलाद सिंह ने पिछले 33 वर्षों में 36 बार रक्तदान कर नया कीर्तिमान बना चुके हैं ।

उनका मानना है कि नियमित रक्तदान की वजह से ही 56 साल की उम्र में भी वे पूरी तरह तंदुरुस्त हैं। कोई बीमारी नहीं छू पाई। रोज सुबह 3:30 बजे उठते हैं। मॉर्निंग वॉक और योग से दिन की शुरुआत करते हैं और कहते हैं कि जो देता है, वो कभी कमजोर नहीं पड़ता।

बाबूजी ने खुद को ही नहीं बल्कि अपने साथियों को भी इस मुहिम से जोड़ा है । समय-समय पर अस्पतालों तथा रक्तदान शिविरों में जाकर रक्तदान किया है । O+ यूनिवर्सल डोनर होने के कारण वे हर ब्लड ग्रुप के मरीज की मदद कर सकते हैं। बाबू प्रहलाद सिंह की अपील है कि किसी को भी इमरजेंसी में रक्त की आवश्यकता हो तो मेरे नंबर 9416906472 पर निसंकोच कॉल करें। किसी भी ब्लड ग्रुप की जरूरत हो, हम तुरंत पहुंचकर रक्तदान करेंगे।

एक हादसा, एक संकल्प और 33 साल की नि:स्वार्थ सेवा और बाबू प्रहलाद सिंह की कहानी हर युवा को संदेश देती है कि असली हीरो वह है जो बिना नाम-शोहरत के जिंदगियां बचाता है।

Edit By: शिवानी राजपूत
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