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गुरुग्राम से चुनाव लड़ें CM – नरबीर के बयान पर सियासी संग्राम : अहीरवाल की राजनीति फिर केंद्र में
GROUND ZER⭕ विशेष हरविंद्र यादव||
हरियाणा की सियासत में एक बयान ने बड़ा राजनीतिक भूचाल खड़ा कर दिया है। गुरुग्राम में आयोजित विकसित बादशाहपुर रैली के मंच से कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को गुरुग्राम से चुनाव लड़ने का न्योता देने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखा टकराव सामने आ गया है। इस बयान ने न सिर्फ विपक्ष को हमला करने का मौका दिया, बल्कि अहीरवाल क्षेत्र की राजनीति, नेतृत्व और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान को भी उजागर कर दिया है।
गुरुग्राम की इस रैली में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। इसी दौरान मंच से बोलते हुए उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि अहीरवाल क्षेत्र के लोग दशकों से चाहते हैं कि उनका अपना मुख्यमंत्री हो। उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि वे अगला विधानसभा चुनाव गुरुग्राम से लड़ें, ताकि अहीरवाल क्षेत्र को “अपना मुख्यमंत्री” मिल सके। अपने बयान में नरबीर सिंह ने यह भी कहा कि वे खुद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए और न ही पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी देगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि वे रोहतक के रहने वाले थे, लेकिन करनाल से चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बने और करनाल ने उन्हें अपना नेता मान लिया।
नरबीर के इस बयान के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंच से ही स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री किसी एक क्षेत्र का नहीं होता, बल्कि पूरे हरियाणा का होता है। उन्होंने कहा कि वे पूरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और हर जिले के विकास के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने गुरुग्राम और बादशाहपुर क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।
इस बयान पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेता वर्धन यादव ने वीडियो जारी कर कहा कि यह बयान अहीरवाल के स्वाभिमान और शौर्य का अपमान है। उन्होंने कहा कि अहीरवाल को “इंपोर्टेड मुख्यमंत्री” की जरूरत नहीं है और यहां की जनता स्थानीय नेता को ही विधायक और मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। वर्धन यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अहीरवाल की राजनीतिक ताकत को अपने हित में इस्तेमाल किया है। उन्होंने यहां तक कहा कि इस तरह के बयान के बाद जनता राव नरबीर को भविष्य में किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेगी।
दरअसल, दक्षिण हरियाणा का अहीरवाल क्षेत्र लंबे समय से सत्ता की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र की 17 में से 14 सीटें जीतकर पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल किया था और अहीरवाल बेल्ट की सभी 11 सीटों पर कब्जा किया था। 2019 में भाजपा को यहां 17 में से 11 सीटें ही मिलीं और अहीरवाल की 11 में से 3 सीटें कांग्रेस व निर्दलीय के खाते में चली गईं, जिसके चलते पार्टी बहुमत से चूक गई और जेजेपी के साथ गठबंधन करना पड़ा। वहीं 2024 के चुनाव में भाजपा ने फिर जोरदार वापसी करते हुए 17 में से 15 सीटें और अहीरवाल की 11 में से 10 सीटें जीत लीं, जिससे उसे 48 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत मिला।
इसी वजह से अहीरवाल क्षेत्र को हरियाणा की राजनीति में “किंगमेकर” माना जाता है और यहां से मुख्यमंत्री बनाने की मांग समय-समय पर उठती रहती है।
यह पूरा विवाद भाजपा के अंदर चल रही खींचतान को भी उजागर करता है। अहीरवाल क्षेत्र के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह कई बार मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जता चुके हैं और हाल ही में उन्होंने यह भी कहा था कि “हमने सरकार बनवाई, लेकिन हमें वाजिब इनाम नहीं मिला।” उनकी बेटी और मंत्री आरती राव ने भी इस बात का समर्थन किया था। दूसरी ओर, राव नरबीर सिंह का बयान भी उनकी राजनीतिक स्थिति और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
स्पष्ट है कि अहीरवाल की राजनीति अब सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रही, बल्कि यह सत्ता संतुलन और नेतृत्व की लड़ाई का केंद्र बन चुकी है। गुरुग्राम से चुनाव लड़ने के इस बयान ने हरियाणा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है—क्या प्रदेश की राजनीति में क्षेत्रीय पहचान हावी होगी या पार्टी की केंद्रीय रणनीति ही अंतिम निर्णय करेगी। आने वाले समय में यह मुद्दा और गहराने की पूरी संभावना है।
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