ज़िला
नारनौल। केंद्र सरकार के 12 गौरवशाली वर्ष : 16 गांवों में चला प्राकृतिक खेती महाअभियान | स्प्रिंकलर सिस्टम पर 85% तक सब्सिडी
नारनौल। केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित 12 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
इसी कड़ी में आज जिला के कृषि एवं बागवानी विभाग की ओर से जिला के 16 गांवों में प्राकृतिक खेती व बागवानी को लेकर एक विशेष जागरूकता महाअभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महाअभियान का उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक कृषि के स्थान पर उन्नत बागवानी और रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है, ताकि हमारे अन्नदाताओं की आय में गुणात्मक वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

आज इस विशेष कार्यक्रम के तहत विभाग के उद्यान विकास अधिकारियों ने स्वयं विभिन्न गांवों का दौरा किया और खेतों की चौपालों पर एकत्रित विशाल किसान समूहों को संबोधित करते हुए बागवानी विभाग की अत्यंत महत्वाकांक्षी व कल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी प्रदान की।
अधिकारियों ने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे पारंपरिक फसलों के घाटे के चक्र से बाहर निकलकर फल, फूल और सब्जियों की आधुनिक खेती को अपनाएं, जो कम लागत और सीमित पानी में अधिक मुनाफा देने में पूरी तरह सक्षम हैं।
आज आयोजित हुए इस विशाल चेतना अभियान के तहत जिला के जिन प्रमुख 16 गांवों को शामिल किया गया। इनमें गांव नीरपुर, भोजावास, हसनपुर, नियाजलीपुर, डिगरौता, स्याना, पोता, नावां, बाछौद, नूनी कलां, शहरपुर, बेरी, कोथल, खानपुर, गहली और मुलोदी शामिल हैं।

इन सभी क्षेत्रों में किसानों के भीतर विभागीय योजनाओं को लेकर उत्साह और नई सीखने की ललक देखने को मिला।
गोष्ठियों के दौरान उद्यान विकास अधिकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई जा रही दो महत्वपूर्ण एवं क्रांतिकारी योजनाओं की संपूर्ण तकनीकी व व्यावहारिक जानकारी साझा की। इसमें पहली प्रमुख योजना एकीकृत बागवानी विकास मिशन है, जिसके तहत सरकार द्वारा किसानों को नए फलदार बाग लगाने, उच्च गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने, आधुनिक ग्रीनहाउस और पॉलीहाउस की स्थापना करने तथा कवकनाशी व जैविक खादों के उपयोग पर भारी वित्तीय सहायता और अनुदान राशि प्रदान की जाती है। इस योजना की सहायता से सामान्य पृष्ठभूमि के छोटे किसान भी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उच्च स्तर की बागवानी शुरू कर सकते हैं क्योंकि सरकार इसमें प्रारंभिक निवेश की एक बहुत बड़ी हिस्सेदारी स्वयं वहन करती है।
इसके साथ ही अधिकारियों ने दूसरी सबसे योजना ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ यानी टपका सिंचाई योजना के बारे में किसानों को गहराई से जागरूक किया। जल संरक्षण और शुष्क क्षेत्रों में खेती को टिकाऊ व सुरक्षित बनाने की दिशा में यह योजना आज के समय में एक बड़ा वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के अंतर्गत खेतों में ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम स्थापित करने के लिए सरकार किसानों को 85 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी उपलब्ध करा रही है, जिससे पानी की भारी बचत तो होती ही है, साथ ही साथ फसलों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सटीक मात्रा में पानी और पोषक तत्व सीधे पौधों की जड़ों तक मिलते हैं।
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