ज़िला
नारनौल | जेईई एडवांस्ड रिजल्ट आते ही सफलता की लूट शुरू : जिन छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया | उनकी उपलब्धि पर अब कौन चमका रहा अपनी दुकान
नारनौल | जेईई एडवांस्ड 2026 का परिणाम घोषित होते ही जिले में कुछ निजी स्कूलों द्वारा शुरू किए गए प्रचार अभियान ने शिक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर जारी पोस्टरों में उन विद्यार्थियों की बड़ी-बड़ी तस्वीरें और नाम प्रकाशित किए जा रहे हैं, जो वर्ष 2025 में संबंधित स्कूलों से 12वीं कक्षा पास कर चुके थे और पिछले एक वर्ष से विभिन्न कोचिंग संस्थानों में रहकर जेईई जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यार्थी स्कूल छोड़ चुका था, तब उसकी जेईई एडवांस्ड की तैयारी किसने करवाई। किस संस्थान में उसने नियमित पढ़ाई की, किसने उसे परीक्षा के लिए मार्गदर्शन दिया और फिर परिणाम आने के बाद अचानक कई संस्थान उसकी सफलता के दावेदार कैसे बन गए। शहर में आम लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या शिक्षा अब सेवा से ज्यादा प्रचार का माध्यम बनती जा रही है। क्या छात्रों की मेहनत को मार्केटिंग सामग्री में बदल दिया गया है।
एक ही छात्र पर कई दावेदार, आखिर सच कौन बोल रहा है
नारनौल में देखने को मिला कि जेईई एडवांस्ड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन विद्यार्थियों को मीडिया के सामने सीएलसी कोचिंग सेंटर में अपने अनुभव साझा करते हुए देखा गया। विद्यार्थियों ने अपनी तैयारी और मार्गदर्शन से जुड़े अनुभव भी वहीं बताए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उन्हीं विद्यार्थियों की तस्वीरें शहर के अलग-अलग निजी स्कूलों के सोशल मीडिया पोस्टरों में भी दिखाई देने लगीं। एक ही छात्र की सफलता पर कई संस्थान अपना-अपना दावा पेश करते नजर आए।
अब आम आदमी पूछ रहा है कि आखिर एक छात्र एक साथ कितने संस्थानों का “टॉपर” हो सकता है।
क्या अभिभावकों को गुमराह किया जा रहा है
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि कोई विद्यार्थी एक वर्ष पहले स्कूल छोड़ चुका है और उसके बाद उसने किसी कोचिंग संस्थान में रहकर विशेष तैयारी की है तो प्रचार सामग्री में पूरी सच्चाई सामने रखी जानी चाहिए। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल इसलिए किसी छात्र की उपलब्धि को स्कूल की उपलब्धि बताया जा सकता है क्योंकि उसने कभी वहां से 12वीं की परीक्षा पास की थी?
यदि ऐसा है तो फिर क्या भविष्य में हर संस्थान अपने पुराने विद्यार्थियों की उपलब्धियों को अपनी वर्तमान सफलता बताकर प्रचार करेगा।
सीएलसी संचालक नरेंद्र सिंह ने क्या कहा?
सीएलसी कोचिंग सेंटर के संचालक नरेंद्र सिंह ने कहा कि संबंधित तीनों विद्यार्थी नियमित रूप से उनके संस्थान में पढ़ रहे थे और जेईई एडवांस्ड की तैयारी भी यहीं कर रहे थे। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों ने अखिल भारतीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है और यह उनके लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि दूसरे संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रकाशित किए जाने पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन अपने संस्थान के बारे में पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकते हैं कि ये विद्यार्थी नियमित रूप से सीएलसी में अध्ययनरत थे और उनकी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी यहीं हुई है।
जनता पूछ रही है ये कड़े सवाल
क्या रिजल्ट आते ही कुछ स्कूलों में “श्रेय कब्जाने की प्रतियोगिता” शुरू हो जाती है?
जब छात्र 2025 में स्कूल छोड़ चुका था तो 2026 की जेईई एडवांस्ड सफलता का श्रेय किस आधार पर लिया जा रहा है? क्या सोशल मीडिया पर चमकदार पोस्टर लगाना ही शिक्षा की गुणवत्ता का प्रमाण है? क्या अभिभावकों को यह बताया जा रहा है कि छात्र पिछले एक वर्ष से कहां और किसके मार्गदर्शन में तैयारी कर रहा था? क्या शिक्षा संस्थानों को अपनी विज्ञापन सामग्री में पूरी सच्चाई नहीं बतानी चाहिए। क्या यह छात्रों की मेहनत का सम्मान है या उनकी उपलब्धियों का व्यावसायिक इस्तेमाल? यदि एक ही छात्र की फोटो कई स्कूल छाप रहे हैं तो वास्तविक योगदान किसका माना जाए?
सफलता छात्र की, श्रेय की राजनीति संस्थानों की
जेईई एडवांस्ड जैसी परीक्षा में सफलता किसी पोस्टर, बैनर या सोशल मीडिया अभियान से नहीं मिलती। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और कठिन तैयारी होती है। इसलिए समाज का एक बड़ा वर्ग मानता है कि विद्यार्थियों की उपलब्धियों को प्रचार का माध्यम बनाने के बजाय उनकी वास्तविक मेहनत और सच्चाई को सामने लाना चाहिए।
फिलहाल नारनौल में चर्चा इस बात की नहीं है कि बच्चे सफल हुए हैं, बल्कि चर्चा इस बात की है कि “आखिर बच्चों की सफलता पर असली हक किसका है और उनकी मेहनत की फसल काटने की कोशिश कौन कर रहा है”
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