ज़िला
अटेली | गरीबी से सेवा तक का सफर : मानवता को बनाया धर्म | पवन राठौड़ बने हजारों युवाओं की प्रेरणा
अटेली | कहा जाता है कि महान कार्यों की नींव संघर्ष की मिट्टी में ही रखी जाती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है पवन कुमार राठौड़ की, जिन्होंने अभावों, कठिनाइयों, संघर्षों और चुनौतियों के बीच अपना जीवन बिताते हुए समाज सेवा को अपना धर्म बना लिया।
पवन राठौड़ मोड़ी का जन्म 2 जनवरी 1985 को हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़ के ग्राम मोड़ी में एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्होंने गरीबी, अभाव और संघर्षपूर्ण जीवन को बहुत करीब से देखा। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए उन्होंने सरकारी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और बारहवीं कक्षा तक अपनी पढ़ाई पूरी की।
लेकिन उनके सपने परिस्थितियों से बड़े थे। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गुरुग्राम, दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में कंप्यूटर, मार्केटिंग, इलेक्ट्रॉनिक इंस्टॉलेशन और विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया। उन्होंने छोटे-छोटे कार्यों से शुरुआत की और अपने परिश्रम, ईमानदारी तथा लगन के बल पर लगभग बीस वर्षों तक विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव प्राप्त किया।
उनका जीवन कभी आसान नहीं रहा। कई बार उन्हें लोगों के धोखे, विश्वासघात और निराशाओं का सामना करना पड़ा। जिन लोगों पर उन्होंने विश्वास किया, उन्हीं में से कुछ लोगों ने उनके मार्ग में बाधाएं खड़ी कीं। कई अवसर ऐसे भी आए जब उनके सामाजिक कार्यों को रोकने का प्रयास किया गया, उनकी आलोचना की गई, उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश की गई। लेकिन उन्होंने हार मानना नहीं सीखा था।
उन्होंने हर कठिनाई को अपनी ताकत बनाया और हर चुनौती को अवसर में बदला। संघर्ष उनके जीवन का हिस्सा बन गया, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा। यही कारण है कि आज वे समाज में एक सम्मानित समाजसेवी और प्रेरणास्रोत के रूप में जाने जाते हैं।
समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए उन्होंने आईसीटीएम सोशल फाउंडेशन की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य केवल सेवा कार्य करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना था। उन्होंने शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और मानव सेवा के क्षेत्र में अनेक कार्य शुरू किए।
गांवों और निजी विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा पहुंचाने का कार्य किया गया। गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए। पर्यावरण संरक्षण के लिए हजारों पौधे लगाए गए। पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करवाई गई। नशामुक्ति अभियान चलाए गए और युवाओं को सही दिशा देने का प्रयास किया गया।
वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान जब पूरा देश कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था, तब पवन राठौड़ मोड़ी और उनकी टीम ने मानव सेवा का एक नया अध्याय शुरू किया। जरूरतमंदों तक राशन, भोजन और सहायता पहुंचाने के साथ-साथ उन्होंने उन बेसहारा और अनाथ लोगों की पीड़ा को महसूस किया जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं था।
इसी भावना से वर्ष 2020 में एक अनाथ एवं बेसहारा आश्रम की शुरुआत की गई, जो आज शांति कुंज प्रभुजन निवास के रूप में संचालित हो रहा है। यहां बेसहारा वृद्धजनों, जरूरतमंद महिलाओं और असहाय लोगों को आश्रय, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने का प्रयास किया जाता है।
आज संस्था द्वारा अलग महिला आश्रम और पुरुष आश्रम संचालित किए जा रहे हैं। अब तक लगभग 60 से अधिक बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं लावारिस लोगों का उपचार करवाकर उन्हें उनके परिवारों से मिलवाया जा चुका है। यह कार्य मानव सेवा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
पवन राठौड़ मोड़ी ने केवल सेवा कार्य ही नहीं किए, बल्कि समाज में उत्पन्न होने वाले विवादों और पारिवारिक समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग 25 से अधिक सामाजिक और पारिवारिक विवादों का समाधान करवाया गया। कई ऐसे परिवार, जो टूटने की कगार पर थे, उनके प्रयासों से पुनः एकजुट हुए और खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
आज हजारों युवा उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं। उनके कार्यों से प्रेरित होकर अनेक लोग समाज सेवा के क्षेत्र में आगे आ रहे हैं। वे हमेशा एक ही संदेश देते हैं—
“यदि कोई धर्म अपनाना है, तो सबसे पहले मानवता धर्म अपनाइए। प्रकृति ने हमें जीवन दिया है, इसलिए हमारा भी कर्तव्य है कि हम समाज, प्रकृति और मानवता के लिए कुछ अच्छा करें। यही सच्ची ईश्वर भक्ति है।”
उनकी इस सोच ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है।
यदि उनके निजी जीवन की बात करें तो उनके परिवार में उनकी माताजी, धर्मपत्नी और दो बच्चे हैं। बड़े भाई (उनका परिवार, पत्नी, दो बच्चे) है। उनकी पत्नी हर सामाजिक कार्य में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं और संस्था की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
आज प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और आम जनता का सहयोग उन्हें निरंतर प्राप्त हो रहा है। विभिन्न सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तरों पर उनके कार्यों की सराहना की जा रही है। हालांकि सामाजिक जीवन में कुछ ऐसे तत्व भी रहे जिन्होंने उनके कार्यों में बाधा डालने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने धैर्य, संयम और सकारात्मक सोच के साथ उन सभी चुनौतियों का सामना किया और निरंतर आगे बढ़ते रहे।
उनका संघर्ष आज भी समाप्त नहीं हुआ है। वे आज भी उसी समर्पण, उसी जुनून और उसी सेवा भावना के साथ कार्य कर रहे हैं, जिसके साथ उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की थी। उनका सपना है कि भविष्य में एक विशाल सेवा संस्थान, आधुनिक अस्पताल, पुनर्वास केंद्र, वृद्धाश्रम, महिला आश्रम, अनाथालय और कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि समाज का कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।
पवन राठौड़ मोड़ी की कहानी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, विश्वास, सेवा, समर्पण और मानवता की एक ऐसी यात्रा है जो यह संदेश देती है कि यदि इरादे नेक हों और मन में समाज के लिए कुछ करने की भावना हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी पराजित किया जा सकता है।
गरीबी से शुरू हुआ यह सफर आज मानवता की सेवा के एक आंदोलन में बदल चुका है, और यही पवन राठौड़ मोड़ी की सबसे बड़ी पहचान है।
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