नारनौल | डीडीपीओ के समर्थन में उतरे कर्मचारी : निलंबन की सिफारिश पर उठाए सवाल | CM को भेजा सामूहिक ज्ञापन

रिपोर्टर: हरविन्द्र यादव
| नारनौल
नारनौल में डीडीपीओ प्रमोद कुमार के समर्थन में ज्ञापन सौंपते विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी।
नारनौल में डीडीपीओ प्रमोद कुमार के समर्थन में ज्ञापन सौंपते विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी।

नारनौल। जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) प्रमोद कुमार के खिलाफ स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव द्वारा की गई निलंबन की सिफारिश के बाद मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री हरियाणा तथा विकास एवं पंचायत मंत्री को ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और निलंबन की सिफारिश वापस लेने की मांग की है।

मामले की शुरुआत 9 जून 2026 को हुई थी, जब स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने नारनौल स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली थी। बैठक सुबह 10 बजे निर्धारित थी। मंत्री तय समय पर पहुंच गई थीं, जबकि डीडीपीओ प्रमोद कुमार करीब 10 मिनट देरी से पहुंचे थे। बैठक के दौरान विकास एवं पंचायत विभाग से जुड़े कार्यों की समीक्षा में भी मंत्री ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने उपायुक्त को डीडीपीओ के निलंबन की सिफारिश करने के निर्देश दिए थे।

अब इस घटनाक्रम के तीन दिन बाद विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने डीडीपीओ के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। 11 जून को भेजे गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने प्रमोद कुमार को कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और सहयोगी अधिकारी बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को मार्गदर्शन दिया है। ज्ञापन के अनुसार उनके कार्यकाल में विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और गति आई है।

कर्मचारियों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि प्रस्तावित कार्रवाई से विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हुआ है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए निलंबन की सिफारिश पर पुनर्विचार किया जाए और इसे वापस लिया जाए।

अब यह मामला केवल एक अधिकारी की देरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विभागीय कर्मचारियों के खुलकर समर्थन में आने से प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर स्वास्थ्य मंत्री अनुशासन और जवाबदेही को लेकर सख्त रुख पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारी और कर्मचारी डीडीपीओ के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस पूरे मामले में क्या फैसला लेती है।

Edit By: शिवानी राजपूत
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