नारनौल | राव की नाराज़गी की वजह बना सरकारी प्रोटोकॉल : बावल जनसभा के बाद चर्चाओं का दौर तेज | भाजपा में बढ़ी सियासी हलचल

रिपोर्टर: हरविन्द्र यादव
| नारनौल

नारनौल | बावल में गत मंगलवार केन्द्रीय कृषि मंत्री एवं हरियाणा के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुई जनसभा पर चर्चा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। जो हुआ सो हुआ, परंतु अब मीडिया और बुद्धिजीवी राव की खिन्नता के कारणों को पता लगाने में लगे हुए हैं । अब तक सूत्रों से मिली अपुष्ट सूचना के अनुसार मामला सरकारी प्रोटोकॉल से जुड़ा हुआ था। प्रोटोकॉल के अनुसार केंद्र के राज्यमंत्री का स्थान प्रदेश के कैबिनेट मंत्री से नीचे होता है। मामला यहीं से शुरू हुआ। हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, जो कैबिनेट मंत्री हैं, वह प्रोटोकॉल में राव साहब से ऊपर थे। अतः हर जगह उनका नाम राव से ऊपर रखा जाना था।

बस इसी बात पर भड़क गए राव । इसके मूल में यह बात भी थी कि राव ने लम्बे समय से कभी अहीरवाल में सरकारी प्रोटोकॉल के पालन की ज़रूरत ही नहीं समझी थी । इसी बावल हल्के में सरकार के पिछले कार्यकाल में डाक्टर बनवारीलाल कैबिनेट मंत्री रहे परंतु इसे उनकी शराफ़त कही जाए या कमजोरी या राव का उन पर एहसान, उन्होंने कभी अपने को ऊपर दिखाने की कोशिश ही नहीं की। बस फिर क्या था,राव साहब भी इसे अपना अधिकार समझ बैठे। परंतु यहाँ अब श्याम सिंह राणा थे बनवारी लाल नहीं । अतः मामला ठीक प्रोटोकॉल के चला और राव के क्रोध की गगरी छलक गई।

यह बात ठीक है कि आज भी राव अपने आपको अहीरवाल का राजा ही समझते हैं और उनकी स्वयं की सोच भी यही है कि उनसे बड़ा कोई नहीं है। बस यही बात नुकसान कर गई। राव साहब यह भूल गए की यह एक सरकारी आयोजन था और वहाँ फैसले प्रोटोकॉल के अनुसार ही हुआ करते हैं। यदि पद की बजाय राजनीतिक क़द से प्रोटोकॉल तय होगा तो कहीं न कहीं उपलब्धि की जगह बड़ी विरासत ले सकती है, जहाँ मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री पिछली पंक्ति में खड़े नज़र आयेंगे।

राव साहब शायद यह भी भूल गए की पार्टी अनुशासन और सरकारी प्रोटोकॉल में रह कर ही बड़प्पन प्राप्त होता है। उनके पीछे उनकी इच्छानुसार चलने वाले यदि कुछ विधायक हैं तो इसलिए हैं कि पार्टी ने उनको उनकी सिफारिश पर टिकट दिया और फिर पार्टी के टिकट पर ही वह चुनाव जीते हैं । फिर यदि पार्टी के विधायकों के बल पर ही पार्टी को आँखें दिखाई जाएं तो संभवतः वह किसी गलतफ़हमी के शिकार हैं।

सरकारी प्रोटोकॉल अहीरवाल या रेवाड़ी के लिए नहीं बना है वह पूरे देश की व्यवस्था को क़ायम रखने के लिए एक राष्ट्रव्यापी व्यवस्था है। अतः वास्तविकता जो भी थी उसे स्वीकार करना चाहिए था। मामला नाराज़ होने तक सीमित रहता तो भी एक बात थी, परंतु जिस तरीक़े से उस जनसभा से पहली रात की जो खबरें छन-छन कर बाहर आ रहीं हैं वह पूरी भाजपा की चिंता को बढ़ा देंगी। और जब पार्टी की चिंता बढ़ेगी तो अंततोगत्वा राव साहब को भी चिंता करनी ही पड़ेगी।

Edit By: शिवानी राजपूत
Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नारनौल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. रितु वाई. के. बहल का स्वागत : जिला बार एसोसिएशन ने किया सम्मानित | बार-बेंच समन्वय से शीघ्र न्याय पर जोर

रामचन्द्र सैनी
|
नारनौल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. रितु वाई के बहल के कार्यभार ग्रहण करने के उपलक्ष्य में गुरुवार को जिला बार एसोसिएशन, नारनौल द्वारा न्यू बार रूम में स्वागत एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला बार एसोसिएशन नारनौल के प्रधान संतोख सि...
Continue Reading

नारनौल | मानसून की पहली बारिश में नगर परिषद के दावों की खुली पोल : डीसी और एसपी आवास के बाहर जलभराव ने खड़े किए बड़े सवाल

हरविन्द्र यादव
|
नारनौल। मानसून की पहली ही बारिश ने नारनौल शहर की जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी। गुरुवार को हुई बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया। सबसे ज्यादा चर्चा जिला उपायुक्त अनुपमा अंजली और जिला पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार के सरका...
Continue Reading

नारनौल। जन समस्याओं के समाधान में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त : समाधान शिविर में 39 शिकायतें पहुंचीं | डीसी अनुपमा अंजली ने दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश

ग्राउंड जीरो न्यूज़
|
समाधान शिविर में आमजन की शिकायतें सुनती डीसी अनुपमा अंजली।
समाधान शिविर में आमजन की शिकायतें सुनती डीसी अनुपमा अंजली।
नारनौल। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आयोजित किए जा रहे समाधान शिविरों की श्रृंखला में बुधवार को लघु सचिवालय नारनौल में उपायुक्त अनुपमा अंजली की अध्यक्षता में समाधान शिविर आयोजित किया गया। शिविर में पहुंचे नागरिकों की सामूहिक एवं व्यक्तिगत शिकायतों को...
Continue Reading
Advertisement

Trending