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नारनौल | राव की नाराज़गी की वजह बना सरकारी प्रोटोकॉल : बावल जनसभा के बाद चर्चाओं का दौर तेज | भाजपा में बढ़ी सियासी हलचल
नारनौल | बावल में गत मंगलवार केन्द्रीय कृषि मंत्री एवं हरियाणा के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुई जनसभा पर चर्चा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। जो हुआ सो हुआ, परंतु अब मीडिया और बुद्धिजीवी राव की खिन्नता के कारणों को पता लगाने में लगे हुए हैं । अब तक सूत्रों से मिली अपुष्ट सूचना के अनुसार मामला सरकारी प्रोटोकॉल से जुड़ा हुआ था। प्रोटोकॉल के अनुसार केंद्र के राज्यमंत्री का स्थान प्रदेश के कैबिनेट मंत्री से नीचे होता है। मामला यहीं से शुरू हुआ। हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, जो कैबिनेट मंत्री हैं, वह प्रोटोकॉल में राव साहब से ऊपर थे। अतः हर जगह उनका नाम राव से ऊपर रखा जाना था।
बस इसी बात पर भड़क गए राव । इसके मूल में यह बात भी थी कि राव ने लम्बे समय से कभी अहीरवाल में सरकारी प्रोटोकॉल के पालन की ज़रूरत ही नहीं समझी थी । इसी बावल हल्के में सरकार के पिछले कार्यकाल में डाक्टर बनवारीलाल कैबिनेट मंत्री रहे परंतु इसे उनकी शराफ़त कही जाए या कमजोरी या राव का उन पर एहसान, उन्होंने कभी अपने को ऊपर दिखाने की कोशिश ही नहीं की। बस फिर क्या था,राव साहब भी इसे अपना अधिकार समझ बैठे। परंतु यहाँ अब श्याम सिंह राणा थे बनवारी लाल नहीं । अतः मामला ठीक प्रोटोकॉल के चला और राव के क्रोध की गगरी छलक गई।
यह बात ठीक है कि आज भी राव अपने आपको अहीरवाल का राजा ही समझते हैं और उनकी स्वयं की सोच भी यही है कि उनसे बड़ा कोई नहीं है। बस यही बात नुकसान कर गई। राव साहब यह भूल गए की यह एक सरकारी आयोजन था और वहाँ फैसले प्रोटोकॉल के अनुसार ही हुआ करते हैं। यदि पद की बजाय राजनीतिक क़द से प्रोटोकॉल तय होगा तो कहीं न कहीं उपलब्धि की जगह बड़ी विरासत ले सकती है, जहाँ मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री पिछली पंक्ति में खड़े नज़र आयेंगे।
राव साहब शायद यह भी भूल गए की पार्टी अनुशासन और सरकारी प्रोटोकॉल में रह कर ही बड़प्पन प्राप्त होता है। उनके पीछे उनकी इच्छानुसार चलने वाले यदि कुछ विधायक हैं तो इसलिए हैं कि पार्टी ने उनको उनकी सिफारिश पर टिकट दिया और फिर पार्टी के टिकट पर ही वह चुनाव जीते हैं । फिर यदि पार्टी के विधायकों के बल पर ही पार्टी को आँखें दिखाई जाएं तो संभवतः वह किसी गलतफ़हमी के शिकार हैं।
सरकारी प्रोटोकॉल अहीरवाल या रेवाड़ी के लिए नहीं बना है वह पूरे देश की व्यवस्था को क़ायम रखने के लिए एक राष्ट्रव्यापी व्यवस्था है। अतः वास्तविकता जो भी थी उसे स्वीकार करना चाहिए था। मामला नाराज़ होने तक सीमित रहता तो भी एक बात थी, परंतु जिस तरीक़े से उस जनसभा से पहली रात की जो खबरें छन-छन कर बाहर आ रहीं हैं वह पूरी भाजपा की चिंता को बढ़ा देंगी। और जब पार्टी की चिंता बढ़ेगी तो अंततोगत्वा राव साहब को भी चिंता करनी ही पड़ेगी।
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