महेंद्रगढ़ । सस्ती शराब मामला ,सरकारी रेट से कम बिक्री : नकली सप्लाई या राजस्व चोरी का खेल, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

रिपोर्टर: रामचन्द्र सैनी
| नारनौल
समय से पहले खुले शराब के ठेके
समय से पहले खुले शराब के ठेके

महेंद्रगढ़ । देशी शराब सरकारी तय रेट से कम कीमत पर बिकने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। जहां 50 डिग्री देशी शराब का सरकारी रेट अद्धा 130 रुपए और पव्वा 75 रुपए निर्धारित है, वहीं ज़मीनी हकीकत में पव्वा 40 से 50 रुपए और अद्धा 70 से 100 रुपए में खुलेआम बेचा जा रहा है। यानी सवाल साफ है कि आखिर ये सस्ती शराब आ कहां से रही है।

आखिर ये सस्ती शराब आ कहां से रही है?

सबसे बड़ा शक राजस्व चोरी पर जाता है। अगर शराब बिना टैक्स चुकाए गैरकानूनी तरीके से सप्लाई हो रही है, तो सरकार को सीधे तौर पर भारी नुकसान हो रहा है। दूसरी तरफ इतने कम दाम पर असली शराब मिलना लगभग नामुमकिन है, जिससे यह आशंका भी गहराती है कि कहीं बाजार में नकली या मिलावटी शराब तो नहीं बेची जा रही, जो लोगों की जान के लिए खतरा बन सकती है।

शराब की सरकारी रेट लिस्ट

शराब की सरकारी रेट लिस्ट

अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही?

कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि ठेकेदार सेल बढ़ाने या स्टॉक खत्म करने के दबाव में नियमों को दरकिनार कर सस्ती बिक्री कर रहे हैं, लेकिन यह भी अपने आप में नियमों का खुला उल्लंघन है। जब खुलेआम सरकारी रेट से कम में शराब बिक रही है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आबकारी विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी की जा रही है। बिना विभागीय ढिलाई या मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर यह संभव नहीं लगता।

समय से पहले ठेके खोलने का खेल भी जारी

नियम के अनुसार शराब ठेकों का समय सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक तय है, लेकिन नारनौल में यह नियम भी कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। शनिवार को निजामपुर रोड पर एक ठेके पर सुबह 8 बजे से पहले ही आधा शटर खोलकर चोरी-छिपे शराब बेची जा रही थी।

इंस्पेक्टर के जवाब ने बढ़ाए सवाल

इस मामले में जब आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार से बात की गई, तो उनका जवाब खुद कई सवाल खड़े कर गया। उन्होंने कहा कि जिन ठेकों पर सस्ती शराब बेची जा रही है, उनके रेट “ठीक करवा दिए जाएंगे।” वहीं समय से पहले ठेके खोलने के सवाल पर पहले उन्होंने इनकार किया, लेकिन जीपीएस फोटो का हवाला देने पर कार्रवाई की बात कही।

अब सवाल यह उठता है कि अगर सब कुछ सही था, तो रेट “ठीक” करवाने की जरूरत क्यों पड़ी। पहले इनकार और फिर कार्रवाई की बात क्या किसी लीपापोती की ओर इशारा करती है। क्या विभाग मौके पर जांच करने के बजाय सिर्फ शिकायत का इंतजार करता है।

मामला छोटा नहीं, सिस्टम पर बड़ा सवाल

सरकारी रेट से सस्ती शराब और समय से पहले बिक्री दोनों ही गंभीर अनियमितताएं हैं। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि राजस्व, जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही तीनों पर बड़ा सवाल है। अब देखना यह है कि इस मामले में कार्रवाई होती है या यह सस्ती शराब का खेल यूं ही चलता रहेगा।

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