ज़िला
नारनौल | भाजपा ऑफिस उद्घाटन पर मंडल अध्यक्षों ने जिला अध्यक्ष को घेरा : बोले कार्यकर्ताओं का अपमान क्यों | मंच पर चमके चहेते | बाहर अपमानित हुए मंडल अध्यक्ष
नारनौल | भाजपा के नए जिला कार्यालय के उद्घाटन समारोह में उस समय पार्टी की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई जब मुख्यमंत्री नायब सैनी के कार्यक्रम के दौरान ही भाजपा के सभी मंडल अध्यक्ष जिला अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आए। एक तरफ मंच से मुख्यमंत्री का भाषण चल रहा था तो दूसरी तरफ भाजपा कार्यालय परिसर में मंडल अध्यक्ष जिला नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए खुलकर नाराजगी जता रहे थे।
भाजपा के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा दृश्य देखने को मिला हो जब मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ही संगठन के महत्वपूर्ण पदाधिकारी अपने ही जिला अध्यक्ष के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराएं। सीएम का स्वागत ना करवाने पर गुस्सान मंडल अध्यक्ष भाजपा कार्यालय भवन परिसर के अंदर आए और नीचे जमीन पर बैठ गए और जिला अध्यक्ष को सरेआम खरी-खोटी सुनाई।

स्टेज पर भाषण दे रहे मुख्यमंत्री नायब सैनी
मंडल अध्यक्षों का आरोप था कि पूरे जिले से कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में लाने, भीड़ जुटाने और कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी उन्होंने निभाई, लेकिन जब सम्मान देने और मुख्यमंत्री के स्वागत का समय आया तो उन्हें ही दरकिनार कर दिया गया। इससे उनके साथ-साथ उनके क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं में भी भारी नाराजगी देखने को मिली।
मामले की जानकारी लेने के लिए जब अटेली मंडल अध्यक्ष मुकेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के स्वागत को लेकर पहले से पूरी योजना बनाई गई थी। सभी मंडल अध्यक्षों को मुख्यमंत्री का स्वागत करना था और इसकी जानकारी एक दिन पहले ही संबंधित लोगों को दे दी गई थी। कार्यक्रम स्थल पर मंच से भी घोषणा की गई कि मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंडल अध्यक्ष आगे आ जाएं, लेकिन जब वे आगे पहुंचे तो सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया क्योंकि उनके पास मंडल अध्यक्षों की सूची ही नहीं थी।

यहीं से विवाद शुरू हो गया। मंडल अध्यक्षों का कहना था कि यदि सूची तैयार की गई थी तो उसे सुरक्षा अधिकारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी थी? आखिर ऐसी कौन सी लापरवाही हुई कि संगठन के सबसे सक्रिय पदाधिकारियों को ही मुख्यमंत्री के स्वागत से दूर रखा गया।
मंडल अध्यक्षों ने आरोप लगाया कि जिला स्तर पर कुछ लोगों ने संगठनात्मक मर्यादाओं को ताक पर रखकर अपनी पसंद और नापसंद के आधार पर व्यवस्थाएं कीं। उनका कहना था कि जिन लोगों ने मैदान में काम किया, कार्यकर्ताओं को जोड़ा और कार्यक्रम को सफल बनाया, उन्हें किनारे कर दिया गया जबकि कुछ ऐसे चेहरे आगे दिखाई दिए जिनका कार्यक्रम की तैयारियों से कोई लेना-देना नहीं था।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब मुख्य मंच की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे। मंच पर मुख्यमंत्री सहित 30 नेताओं के लिए मंच पर स्थान निर्धारित था, इसकी लिए बाकायदा सूची बनाई गई लेकिन सूची से बाहर कई नेता मंच पर पहुंच गए और कुर्सियां संभालकर बैठ गए। आखिर जब मुख्य मंच पर लिस्ट से बाहर के नेताओं द्वारा नेतागिरी चमकाई जा रही थी, दूसरी तरफ मंडल अध्यक्षों को न केवल मंच से दूर रखा गया बल्कि मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए निर्धारित गैलरी तक में प्रवेश नहीं दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकार दीर्घा में भी सूची को लेकर विवाद सामने आया। नेशनल चैनल के एक पत्रकार को सुरक्षा कर्मियों द्वारा उठाए जाने के बाद जब सूची तैयार करने वाले की जानकारी मांगी गई तो पुलिस और जनसंपर्क विभाग दोनों ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। बाद में यह चर्चा भी रही कि सूची जिला अध्यक्ष ने तैयार करवाई थी।
पूरे घटनाक्रम ने भाजपा संगठन के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पार्टी के मंडल अध्यक्ष ही अपने सम्मान और भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराज हैं तो आखिर संगठनात्मक समन्वय कहां है? क्या जिला स्तर पर निर्णय कुछ लोगों तक सीमित हो गए हैं? क्या कार्यकर्ताओं और संगठन के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है?
मुख्यमंत्री नायब सैनी के सामने घटित इस घटनाक्रम ने भाजपा के नए कार्यालय के उद्घाटन से ज्यादा चर्चा संगठन के भीतर की नाराजगी को दे दी। अब राजनीतिक गलियारों में यही सवाल गूंज रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ऐसा कौन जिम्मेदार था जिसने पार्टी के अपने ही मंडल अध्यक्षों को अपमानित महसूस करने पर मजबूर कर दिया।
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