नांगल चौधरी | वीरांगनाओं के आदर्शों पर चलने का आह्वान : बेटियों को आत्मनिर्भर बनने की सीख | इंजी. पूनम शर्मा ने किया प्रेरित

रिपोर्टर: मंजीत सोनी
| नांगल चौधरी

नांगल चौधरी। आर्य वीरांगना चरित्र निर्माण एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर-2026 में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचीं इंजी. पूनम शर्मा ने बालिकाओं को भारत की महान वीरांगनाओं के प्रेरणादायक जीवन से अवगत कराते हुए आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और संस्कारी बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत की धरती सदैव ऐसी वीर नारियों को जन्म देती रही है जिन्होंने साहस, त्याग, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति की मिसाल कायम की।

अपने संबोधन में इंजी. पूनम शर्मा (एम.टेक.), जो पाली यूनिवर्सिटी से जुड़ी हैं और वर्तमान में गांव डिगरोता की सरपंच भी हैं, ने रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर, माता जीजाबाई, बेगम हजरत महल, कल्पना चावला तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जैसी महान महिलाओं के संघर्षपूर्ण जीवन और उनके योगदान का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इन वीरांगनाओं ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति तथा परिश्रम से इतिहास में अमिट पहचान बनाई।

उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि एक साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना उनके संघर्ष, समर्पण और मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू ने जीवन में आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद कभी हार नहीं मानी और शिक्षा व सेवा के बल पर लगातार आगे बढ़ती रहीं।

इंजी. पूनम शर्मा ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। यदि वे शिक्षा, आत्मरक्षा, आत्मविश्वास और संस्कारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तो हर चुनौती का डटकर सामना कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और मजबूत बनने के लिए बेटियों को मानसिक, बौद्धिक और नैतिक रूप से भी सशक्त होना जरूरी है।

उन्होंने सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को लेकर भी बालिकाओं को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि झूठी चमक-दमक और भटकाने वाली चीजों से दूर रहकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। माता-पिता का सम्मान करना और उनकी बातों का पालन करना जीवन की सबसे बड़ी सफलता की कुंजी है।

उन्होंने कहा कि समाज में वही व्यक्ति सम्मान प्राप्त करता है जो स्वयं को शिक्षित, संस्कारी और मजबूत बनाता है। इसलिए बेटियों को महान वीरांगनाओं और प्रेरणादायक महिलाओं के जीवन से सीख लेकर अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहिए और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित बालिकाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ आत्मरक्षा प्रशिक्षण में भाग लिया और प्रेरणादायक विचारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

Edit By: न्यूज डेस्क
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