नारनौल। खटोटी खुर्द में सोलर प्लांट की तीसरी बिजली लाइन को लेकर बड़ा विवाद : ग्रामीणों ने रुकवाया कार्य | फर्जी सहमति पत्र का आरोप | आंदोलन की चेतावनी

रिपोर्टर: हरविन्द्र यादव
| नारनौल
सोलर लाइन विवाद को लेकर मौके पर जुटे ग्रामीण और अधिकारी।

नारनौल। महेंद्रगढ़ जिले के गांव खटोटी खुर्द में सोलर पावर प्लांट के लिए प्रस्तावित तीसरी बिजली लाइन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार को बिजली विभाग और ठेकेदार द्वारा लाइन बिछाने का कार्य शुरू किए जाने पर ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और कार्य रुकवा दिया। हालात को देखते हुए प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा तथा ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति भी की गई। कई घंटों तक चले विरोध और बातचीत के बाद फिलहाल काम रोक दिया गया है। वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते समाधान नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

खटोटी खुर्द में तीसरी बिजली लाइन के विरोध में एकत्र ग्रामीण।

खटोटी खुर्द में तीसरी बिजली लाइन के विरोध में एकत्र ग्रामीण।

सरपंच प्रतिनिधि रण सिंह ने बताया कि गांव की फिरनी (मुख्य रास्ते) की कुल चौड़ाई 22 फीट है। इस रास्ते के दोनों ओर पहले से ही सोलर पावर प्लांट की दो बिजली लाइनें गुजर रही हैं। अब एक अन्य सोलर पावर प्लांट के लिए तीसरी लाइन बिछाई जा रही है, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई लाइन के लिए अलग से खंभे लगाने की बजाय पहले से मौजूद बिजली लाइनों के ढांचे का उपयोग किया जाए और एक लाइन के ऊपर से दूसरी लाइन को निकाला जाए, ताकि गांव के रास्ते पर अतिरिक्त कब्जा न हो और लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े।

ग्रामीणों का कहना है कि 22 फीट चौड़े रास्ते में पहले ही लगभग 18 फीट जगह ही उपयोग योग्य बची है, जबकि दोनों ओर करीब दो-दो फीट भूमि नालियों के निर्माण और जल निकासी के लिए छोड़ी गई थी। ऐसे में यदि बिजली विभाग तीसरी लाइन के लिए नए खंभे खड़े करता है तो रास्ता और संकरा हो जाएगा, जिससे ग्रामीणों, किसानों और बड़े वाहनों की आवाजाही प्रभावित होगी।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जिस भूमि को नालियों और जल निकासी व्यवस्था के लिए छोड़ा गया था, यदि उसी पर बिजली विभाग अपने पोल स्थापित कर देता है तो भविष्य में बरसात का पानी और घरों से निकलने वाला गंदा पानी कहां से निकलेगा। उनका कहना है कि इससे गांव में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। बरसात के दिनों में रास्तों पर पानी जमा होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग गांव की मूलभूत सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को नजरअंदाज कर कार्य कर रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी जिला उपायुक्त को एक मांग पत्र सौंपा जा चुका है। ज्ञापन में मांग की गई थी कि या तो बिजली लाइन को भूमिगत (अंडरग्राउंड) किया जाए अथवा पहले से स्थापित दो लाइनों में से किसी एक के ऊपर से नई लाइन को निकाला जाए, ताकि अलग से नए खंभे लगाने की आवश्यकता न पड़े। लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

बुधवार को जब ठेकेदार द्वारा लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया तो बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध बढ़ता देख प्रशासन हरकत में आया और मौके पर पुलिस बल के साथ ड्यूटी मजिस्ट्रेट को भी तैनात किया गया। ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच लंबे समय तक बातचीत चली, जिसके बाद फिलहाल कार्य को रोक दिया गया।

मौके पर पहुंचे दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के एसई ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और ग्रामीण शांत हुए। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।

सरपंच प्रतिनिधि रण सिंह ने बताया कि उन्होंने बिजली विभाग और प्रशासन से एक दिन का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया तो गांव के लोग आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहमति और हितों की अनदेखी कर किसी भी कीमत पर तीसरी लाइन नहीं बिछाने दी जाएगी।

इसी बीच इस पूरे मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब सरपंच प्रतिनिधि ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सोलर पावर प्लांट की लाइन बिछाने की प्रक्रिया के दौरान ग्राम पंचायत की ओर से बिजली विभाग को जो सहमति पत्र भेजा गया था, उस पर गांव की सरपंच ज्योति के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पंचायत की ओर से इस प्रकार की कोई वास्तविक सहमति नहीं दी गई थी और संबंधित दस्तावेज की जांच होनी चाहिए।

रण सिंह ने कहा कि इस मामले में पुलिस को शिकायत दी जाएगी तथा कथित फर्जी हस्ताक्षर करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि यदि सहमति पत्र वास्तव में फर्जी पाया जाता है तो यह गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग के एसडीओ ने बताया कि विभाग 1 मेगावाट क्षमता की लाइन स्थापित करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि गांव के सरपंच पति और कुछ ग्रामीणों द्वारा कार्य रुकवाया गया है। एसडीओ के अनुसार लाइन बिछाने का कार्य पूरी तरह सरकारी नियमों और उच्च अधिकारियों से प्राप्त आदेशों के अनुसार किया जा रहा है तथा विभाग सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन कर रहा है।

अब यह मामला केवल बिजली लाइन बिछाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कथित फर्जी सहमति पत्र, गांव की फिरनी पर अतिक्रमण, जल निकासी व्यवस्था पर संभावित प्रभाव और ग्रामीणों के आंदोलन की चेतावनी के कारण प्रशासनिक और कानूनी रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन, बिजली विभाग और ग्रामीणों के बीच होने वाली बातचीत इस विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि खटोटी खुर्द में सोलर प्लांट की तीसरी बिजली लाइन को लेकर चल रहा यह विवाद किस निष्कर्ष तक पहुंचता है।

Edit By: शिवानी राजपूत
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