फतेहाबाद। फायर कर्मचारियों की हड़ताल 13वें दिन में, सेवाएं ठप : फतेहाबाद, रतिया, टोहाना में बढ़ा फायर रिस्क | कम वेतन व मांगों को लेकर कर्मचारियों में रोष

रिपोर्टर: राजेश भाम्भू
| फतेहाबाद
फायर कर्मचारियों के धरने को समर्थन देते पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिलांखेड़ा।
फायर कर्मचारियों के धरने को समर्थन देते पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिलांखेड़ा।

जिले में अग्निशमन कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को 13वें दिन में प्रवेश कर गई है, जिससे फतेहाबाद, रतिया और टोहाना में फायर ब्रिगेड सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। इस स्थिति के चलते पूरा जिला फायर रिस्क पर आ गया है और आमजन में चिंता का माहौल बना हुआ है।

फतेहाबाद फायर ब्रिगेड कार्यालय के बाहर कर्मचारियों ने ब्लॉक प्रधान विनोद खिचड़ की अध्यक्षता में जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धरने का संचालन राज्य सचिव सतबीर सहारण द्वारा किया गया। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिलाखेड़ा भी धरना स्थल पर पहुंचे और कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वे बेहद कम वेतन और जानलेवा जोखिम के बीच काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद अग्निकांड में शहीद हुए दो कर्मियों को अब तक शहीद का दर्जा, एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और उनके परिजनों को सरकारी नौकरी नहीं दी गई है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है। इसके अलावा 16 हजार रुपये के कम वेतन और लंबे समय से लंबित प्रमोशन की समस्या भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है।

आग की सूचना के बावजूद दफ्तर में खड़ी दमकल गाड़ी।

आग की सूचना के बावजूद दफ्तर में खड़ी दमकल गाड़ी।

धरने को संबोधित करते हुए प्रहलाद सिंह गिलाखेड़ा ने कहा कि फायर कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की रक्षा करते हैं, लेकिन किसी हादसे के बाद सरकार का सहयोग न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने किसानों और आमजन से अपील की कि वे आपात स्थिति के लिए स्वयं सतर्क रहें।

इधर, गेहूं कटाई के पीक सीजन में हड़ताल के कारण कई गांवों में आग लगने की घटनाओं से किसानों की चिंता बढ़ गई है। गांव भोडियाखेड़ा में किसान के खेत में तूड़ी में भीषण आग लग गई, वहीं धांगड़ गांव में भी बटोड़े आग की चपेट में आ गए। सूचना देने पर दमकल की सीमित गाड़ियां ही मौके पर पहुंच सकीं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दमकल केंद्र पर एक गाड़ी पूरी तरह तैयार खड़ी थी, लेकिन चालक की अनुपलब्धता के कारण उसे भेजा नहीं जा सका। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल 13 दिनों से जारी इस हड़ताल के कारण जिले में किसी भी बड़ी अनहोनी का खतरा बना हुआ है और आम जनता भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

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