फतेहाबाद | धूप में तपकर जताया विरोध : अर्धनग्न किसानों का DC कार्यालय की ओर मार्च
फतेहाबाद | फसल खराब होने के बाद भी मुआवजा और बीमा राशि नहीं मिलने से परेशान फतेहाबाद जिले के गांव दैयड़ के किसानों का गुस्सा सोमवार को सड़क पर फूट पड़ा। प्रशासन की अनदेखी से नाराज किसान अर्धनग्न होकर 37 किलोमीटर पैदल मार्च पर निकल पड़े। किसान जिला मुख्यालय पर पहुंच कर डीसी डॉ.विवेक भारती […]

फतेहाबाद | फसल खराब होने के बाद भी मुआवजा और बीमा राशि नहीं मिलने से परेशान फतेहाबाद जिले के गांव दैयड़ के किसानों का गुस्सा सोमवार को सड़क पर फूट पड़ा।
प्रशासन की अनदेखी से नाराज किसान अर्धनग्न होकर 37 किलोमीटर पैदल मार्च पर निकल पड़े। किसान जिला मुख्यालय पर पहुंच कर डीसी डॉ.विवेक भारती से मुलाकात करेंगे।
उनसे जल्द मुआवजा दिलाने की मांग की जाएगी। हालांकि, इससे पहले किसानों ने पांच दिन तक गांव में तपती धूप में धरना दिया। इसके बावजूद कोई अधिकारी उनकी मांग सुनने नहीं पहुंचा। विधायक बलवान दौलतपुरिया और इनेलो नेत्री सुनैना चौटाला ने भी इस मामले में किसानों का समर्थन किया था। उन्होंने डीसी से भी बात की।

फसल मुआवजे की मांग को लेकर भीषण गर्मी में अर्धनग्न होकर पैदल मार्च करते फतेहाबाद के किसान
हालांकि, गांव में चल रहे धरने पर अन्य किसान बैठकर विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे। जिला मुख्यालय पर किसान संगठन भी इन अर्धनग्न किसानों का समर्थन करने पहुंचेंगे।
गांव दैयड़ से किसान महेंद्र जाखड़, सुनील चाहर, कालूराम बगड़िया, कमल कस्वां, विनाेद पूनिया, मोहनलाल सूत, कृष्ण गढ़वाल, राकेश सहारण, मांडा गढ़वाल, बुधराम सहारण, भीम सिगड़, कुलदीप भांभू, प्रवीण मांजू, विनोद सहारण, भरत सिंह कटेवा भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच गांव से जिला मुख्यालय की ओर रवाना हुए।
उनका आरोप है कि फसलें पूरी तरह खराब होने के बावजूद न तो बीमा कंपनियों ने दावे स्वीकार किए और न ही प्रशासन ने राहत देने की कोई गंभीर कोशिश की। किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों और बीमा कंपनियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझकर उनकी फसलों पर ऑब्जेक्शन लगा दिए गए।
किसानों ने बताया कि साल 2025 में उनकी नरमे की फसल खराब हुई थी। तब भट्टू ब्लॉक के सभी 24 गांवों में बीमा क्लेम देने में ऑब्जेक्शन लगा दिया गया। फिर कुछ गांवों का ऑब्जेक्शन हटाया गया, लेकिन हमारे गांव का ऑब्जेक्शन अभी तक लगा हुआ है। बीमा करने वाली कंपनी रिलायंस है।
कंपनी 18 हजार रुपए मुआवजा देना चाहती है जबकि कम से कम 36 हजार रुपए का मुआवजा बनता है। इसलिए किसान अपने हकों को पाने के लिए धरने-प्रदर्शन के जरिए अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अधिकारियों का रुख किसानों की बजाय बीमा कंपनी के प्रति ज्यादा है।



