नारनौल। ग्रीवेंस बैठकों पर उठे सवाल : आदेशों की साख पर संकट | समाधान की जगह ‘शो’ का आरोप

रामचन्द्र सैनी
|
नारनौल

नारनौल। करीब दो दशक पूर्व हरियाणा सरकार द्वारा जनहित में शुरू की गई मासिक ग्रीवेंस बैठकों की उपयोगिता पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। हर महीने प्रदेश के मंत्री जिला स्तर पर आम जनता की समस्याएं सुनने के लिए बैठक करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इन बैठकों का परिणाम अधिकांश मामलों में शून्य नजर आता है।

जिलों से लगातार ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां मंत्री तो बैठक की अध्यक्षता करते हैं, लेकिन अधिकारी उनकी बातों को गंभीरता से लेने के बजाय कई बार खुलकर बहस करते हुए भी देखे गए हैं। स्थिति यहां तक पहुंच जाती है कि मंत्रियों द्वारा दिए गए सख्त निर्देश, यहां तक कि सस्पेंड करने के आदेश भी कागजों तक सीमित रह जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन बैठकों में दिए गए आदेशों की वास्तविक वैल्यू क्या रह गई है?

दूसरी ओर, ग्रीवेंस कमेटियों की संरचना भी विवादों में है। कमेटियों में सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे यह मंच समाधान की बजाय शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बनता दिख रहा है। खासकर जिला महेंद्रगढ़ की बैठकों का नजारा हर बार चर्चा का विषय बनता है। यहां कई बार खुद सत्ताधारी दल के पदाधिकारी और कमेटी सदस्य एक समूह बनाकर खड़े हो जाते हैं और किसी विशेष अधिकारी को निशाने पर ले लेते हैं।

बैठक के दौरान मंच के नीचे से शुरू हुआ यह दबाव, मंच के ऊपर बैठे किसी ना किसी नेताओं के हस्तक्षेप के साथ और तेज हो जाता है। नतीजा यह निकलता है कि जिस अधिकारी को टारगेट किया जाता है, उसे भरी बैठक में सार्वजनिक रूप से फटकार मिलती है और कभी-कभी निलंबन तक की नौबत आ जाती है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आम जनता, जो महीनों तक अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में इन बैठकों तक पहुंचती है। उनको तो ठोस समाधान कम ही मिल पाता है। लेकिन जो कमेटी के सदस्य है अंदर अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं। वही अनेक लोग अपनी फरियाद मौके पर इसलिए लेकर पहुंच जाते है कि शायद उनकी भी सुनवाई हो जाए लेकिन ऐसे फरियादियों को बैठक स्थल में प्रवेश तक नहीं मिल पाता है। जबकि सही मायने में तो  यह मंच उनके लिए ही बनाया गया और वही लोग हाशिए पर नजर आते हैं।

ऐसे हालात में यह कहना गलत नहीं होगा कि ग्रीवेंस बैठकों का मूल उद्देश्य भटक चुका है। अब जरूरत है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस व्यवस्था की गंभीर समीक्षा करें।

या तो इन बैठकों के लिए सख्त और पारदर्शी मानक तय किए जाएं, जिससे आम जनता की समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित हो सके, या फिर जनता के हित में कोई नया और प्रभावी विकल्प तलाशा जाए। फिलहाल, व्यवस्था की खामियों का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जबकि कुछ जिलों में यह मंच आपसी राजनीति और दबाव की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नारनौल | रेवाड़ी रोड आपार होटल में हड़कंप: पिता की डांट से घबराया युवक तीसरी मंजिल पर चढ़ा, पुलिस ने सुरक्षित उतारा

हरविन्द्र यादव
|
नारनौल | रेवाड़ी रोड स्थित आपार होटल में उस समय हड़कंप मच गया जब शराब पी रहे चार युवकों में से एक युवक अपने पिता के आने पर डर गया और तीसरी मंजिल की खिड़की पर चढ़ गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश देकर युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया। जानकारी के ...
Continue Reading

नारनौल। एचसीएस परीक्षार्थियों को राहत : रोडवेज की विशेष बसें बनी सहारा | समय पर केंद्र पहुंचे अभ्यर्थी

रामचन्द्र सैनी
|
एचपीएससी की परीक्षा देने के लिए रोडवेज की यात्रा करते अभ्यर्थी।
एचपीएससी की परीक्षा देने के लिए रोडवेज की यात्रा करते अभ्यर्थी।
हरियाणा सरकार के दिशा-निर्देशों और उपायुक्त अनुपमा अंजली के मार्गदर्शन में हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित एचसीएस एवं अन्य एलाइड सर्विसेज की प्रारंभिक परीक्षा के लिए परीक्षार्थियों हेतु विशेष परिवहन व्यवस्था की गई, जिससे अभ्यर्थियों का सफर सुगम ह...
Continue Reading

नारनौल। सखी केंद्र का औचक निरीक्षण : पीड़ित महिलाओं को संवेदनशील सहायता के निर्देश | मुफ्त कानूनी मदद पर जोर

रामचन्द्र सैनी
|
रिकॉर्ड की जांच करती सीजेएम नीलम कुमारी।
रिकॉर्ड की जांच करती सीजेएम नीलम कुमारी।
नारनौल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीलम कुमारी ने सोमवार को नारनौल स्थित वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र में हिंसा पीड़ित महिलाओं को दी जा रही सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था...
Continue Reading
Advertisement

Trending

error: