नारनौल में जल संकट का उल्टा वार: 10-12 फीट पर पानी, बेसमेंट बने मुसीबत का गढ़

रामचन्द्र सैनी
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महेंद्रगढ़ (नारनौल )

बेसमेंट में टैंक बनकर मोटर से पानी निकलने में दिक्कत।
बेसमेंट में टैंक बनकर मोटर से पानी निकलने में दिक्कत।

नारनौल शहर में इन दिनों एक अनोखी लेकिन गंभीर समस्या तेजी से उभरकर सामने आई है। जहां आमतौर पर जल संकट यानी पानी की कमी की शिकायतें सामने आती हैं, वहीं नारनौल में बढ़ता हुआ भू-जल स्तर अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। खासकर हुडा सेक्टर और मुख्य बाजार क्षेत्र के भवन मालिक इस स्थिति से बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं।

10–12 फीट में ही पानी, बेसमेंट बेकार

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में हालात पूरी तरह बदल गए हैं। पहले जहां पानी काफी गहराई में मिलता था, अब मात्र 10 से 12 फीट की खुदाई करते ही पानी निकल आता है। इसका सीधा असर उन भवनों पर पड़ रहा है, जिनमें बेसमेंट बनाए गए हैं। कई मकानों और दुकानों के बेसमेंट में लगातार पानी भर रहा है, जिससे उनका उपयोग लगभग बंद हो गया है। मोटर के जरिए पानी निकालने के बाद भी कुछ ही समय में बेसमेंट फिर से भर जाता है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।

बेसमेंट कम करके लेंटर डालने पर आता पानी।

बेसमेंट कम करके लेंटर डालने पर आता पानी।

इमारतों पर भी खतरा

यह समस्या केवल उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इमारतों की मजबूती पर भी खतरा बनती जा रही है। दीवारों में सीलन, फर्श में नमी और नींव के कमजोर होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भवनों की संरचना को गंभीर नुकसान हो सकता है।

तोड़फोड़ के बाद बेकार पड़ा बेसमेंट

तोड़फोड़ के बाद बेकार पड़ा बेसमेंट

क्यों बढ़ रहा है जल स्तर?

जानकारों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, भू-जल स्तर बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें बारिश के पानी की उचित निकासी न होना, शहर में तेजी से बढ़ता कंक्रीट जिससे पानी जमीन में समा नहीं पाता, ड्रेनेज सिस्टम की कमी या खराब व्यवस्था, और आसपास के क्षेत्रों से पानी का शहर की ओर बहाव शामिल हैं।

प्रशासन से समाधान की मांग

इस समस्या से परेशान भवन मालिकों ने प्रशासन और सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे क्षेत्र का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराया जाए और भूमिगत जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष योजना लागू की जाए ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

“सरकार योजना बनाए, हम साथ हैं”

कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि सरकार कोई ठोस योजना बनाती है, तो वे उसमें आर्थिक सहयोग देने के लिए भी तैयार हैं। उनका मानना है कि यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर से जुड़ा मुद्दा है।

इस बीच प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब जल स्तर लगातार बढ़ रहा था, तो समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बढ़ती समस्या पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।

 प्रशासन पर उठ रहे सवाल

कुल मिलाकर, नारनौल में बढ़ता हुआ भू-जल स्तर अब राहत नहीं, बल्कि आफत का कारण बनता जा रहा है। यदि समय रहते प्रभावी योजना नहीं बनाई गई, तो आने वाले समय में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है और शहर की बुनियादी संरचना पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

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