जल बैठकें कर गांव का पेयजल मैप तैयार करें : पंचायतें निभाएं वाटर मैनेजर की भूमिका
नारनौल हरविन्द्र यादव : जल जीवन मिशन में जहां महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को संभालने में भी महिलाओं की भूमिका अग्रणी बनकर उभर रही है। यह बात जिला सलाहकार मंगतुराम सरसवा ने जल महोत्सव पखवाड़े के दौरान आयोजित महिलाओं के बतौर “वाटर मैनेजर” सम्मान […]

नारनौल हरविन्द्र यादव : जल जीवन मिशन में जहां महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को संभालने में भी महिलाओं की भूमिका अग्रणी बनकर उभर रही है। यह बात जिला सलाहकार मंगतुराम सरसवा ने जल महोत्सव पखवाड़े के दौरान आयोजित महिलाओं के बतौर “वाटर मैनेजर” सम्मान समारोह में कही।
उन्होंने बताया कि ग्राम जल एवं सीवरेज समिति में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं वाटर मैनेजर की भूमिका निभा रही हैं, जिन्हें “जल सखी” के रूप में भी जाना जाता है। ये महिलाएं गांव में पेयजल प्रबंधन, गुणवत्ता जांच, पेयजल शुल्क संग्रह, नए कनेक्शन प्रदान करने तथा जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।
आज सिहमा खंड की मेई, हुडिना, रामपुरा, फैजाबाद, अकबरपुर रामू, मित्रपुरा, शहरपुर, आजमनगर व सलूनी ग्राम पंचायतों को प्रशिक्षण हेतु आमंत्रित किया गया। इस दौरान पंचायतों को पेयजल व्यवस्था के संचालन एवं रखरखाव की नई नीति के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि अब ग्राम पंचायतें स्वयं पेयजल व्यवस्था को संभालें और ग्राम जल एवं सीवरेज समिति के माध्यम से बैंक खाते से लेन-देन शुरू करें।
जिला सलाहकार ने कहा कि ग्राम जल एवं सीवरेज समिति की नियमित बैठकें कर गांव का पेयजल मैप तैयार किया जाए, ताकि गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि जल की अधिकता के बावजूद पेयजल सीमित है, इसलिए उचित जल प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए ग्राम पंचायतों को आगे आकर पहल करनी होगी, जबकि तकनीकी सहायता के लिए जिला तकनीकी इकाई हमेशा तैयार है।
नीति आयोग के एबी फेलो मणि प्रकाश ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि ग्राम जल एवं सीवरेज समिति का प्रत्येक सदस्य अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे, तो गांव को स्वच्छ एवं सुजल बनाया जा सकता है।
बीआरसी धर्मेंद्र ने जल जीवन मिशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बीआरसी अशोक कुमार ने जल प्रबंधन के साथ-साथ रिकॉर्ड बुक व लॉग बुक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक गतिविधि का लिखित रिकॉर्ड रखना जरूरी है। जिला लैब से चेतन शर्मा ने फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से पेयजल की गुणवत्ता जांच की विधि समझाई। वहीं बीआरसी विक्रम सिंह ने मोटर व स्टार्टर के रखरखाव से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
इस अवसर पर बीआरसी अनिता, इंद्रजीत, मोहित कुमार, पूजा रानी, नीशु, अशोक कुमार, विक्रम सिंह, धर्मेंद्र सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के सदस्य उपस्थित रहे।
22 मार्च को जिलेभर में मनाया जाएगा विश्व जल दिवस
जिला सलाहकार मंगतुराम सरसवा ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जिलेभर में 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाएगा। इसके लिए सभी ग्राम जल एवं सीवरेज समिति सदस्यों व ग्राम पंचायतों के सरपंचों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने गांवों में बैठकें आयोजित कर जल संरक्षण का संदेश दें तथा सामुदायिक रैलियां निकालें।
इसके साथ ही नलकूप चालक एवं पंप ऑपरेटर अपने-अपने पेयजल स्रोतों की सफाई सुनिश्चित करें और ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित करें। घर-घर जाकर नलों पर टोंटी लगाने का भी आह्वान किया गया है। जिला स्तर पर विभाग द्वारा “नल जल मित्रों” को भी प्रशिक्षण कार्यशालाओं के माध्यम से पेयजल संचालन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
Editor: State Desk



