नारनौल I CLC कोचिंग सेंटर पर बड़ा खुलासा: पर्सनल ओमनी वैन से बच्चों की ढुलाई I कनीना हादसे के बाद भी नहीं जागा सिस्टम

हरविन्द्र यादव
|
महेंद्रगढ़ (नारनौल )

पर्सनल ओमनी वैन से बच्चों की ढुलाई

नारनौल में CLC कोचिंग सेंटर एक बार फिर विवादों में है। अवैध भवन के बाद अब बच्चों की ढुलाई के लिए निजी वाहनों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है, जिससे सुरक्षा और कानून दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

भवन के बाद अब वाहन मामला

नारनौल में संचालित CLC कोचिंग सेंटर अब एक और गंभीर विवाद में घिर गया है। बिना नक्शा तीन मंजिला भवन के बाद अब यहां बच्चों की ढुलाई के लिए पर्सनल नंबर प्लेट वाली ओमनी वैन के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। आरोप है कि इन वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर लाया-ले जाया जा रहा है, जो सीधे-सीधे कानून और सुरक्षा मानकों की अनदेखी है।

पर्सनल वाहन का कमर्शियल उपयोग

मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार किसी भी निजी वाहन का उपयोग कमर्शियल गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता। यदि कोई वाहन बच्चों की नियमित ढुलाई में लगाया जाता है, तो उसे ट्रांसपोर्ट व्हीकल की श्रेणी में आकर परमिट, फिटनेस और अन्य नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। धारा 66 के तहत बिना परमिट वाहन चलाना अवैध है, जबकि धारा 192A में जुर्माना और जेल तक का प्रावधान है। असुरक्षित वाहन पर धारा 190 और बिना बीमा के उपयोग पर धारा 196 लागू हो सकती है।

कनीना क्षेत्र में हुए दर्दनाक स्कूल बस हादसा [file Photo]

कनीना क्षेत्र में हुए दर्दनाक स्कूल बस हादसा [file Photo]

कनीना हादसा 6 बच्चों की गई थी जान

महेंद्रगढ़ जिले में 11 अप्रैल 2024 को कनीना क्षेत्र में हुए दर्दनाक स्कूल बस हादसे में 6 बच्चों की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया था कि अधिकांश वाहनों के पास वैध फिटनेस और बीमा नहीं था। इसके बाद प्रशासन ने सख्ती के आदेश दिए, लेकिन अब CLC में सामने आ रही स्थिति बताती है कि जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदले।

सुरक्षित स्कूल वाहन नियम लागू, लेकिन पालन नहीं

हरियाणा सरकार की “सुरक्षित स्कूल वाहन नीति” के तहत बच्चों की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले हर वाहन में परमिट, फिटनेस और सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। जिला प्रशासन भी इसे अनिवार्य कर चुका है, इसके बावजूद नियमों की अनदेखी चिंता का विषय है।

 RTO, पुलिस, शिक्षा विभाग और प्रशासन सब सवालों में

इस पूरे मामले में जिम्मेदारी कई विभागों पर बनती है। परिवहन विभाग (RTO) को बिना परमिट वाहनों पर कार्रवाई करनी होती है। पुलिस को ओवरलोडिंग रोकनी होती है। शिक्षा विभाग को संस्थान की निगरानी करनी होती है, जबकि स्थानीय प्रशासन को शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी होती है।

CLC का नेटवर्क कई शहरों में फैला है। नारनौल में यह फ्रेंचाइजी है या सीधे मुख्य संस्थान के नियंत्रण में—यह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि नियम उल्लंघन की जिम्मेदारी किसकी बनती है।

बच्चों की सुरक्षा दांव पर

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है, लेकिन विकल्पों की कमी के कारण वे मजबूरी में इसी व्यवस्था का उपयोग कर रहे हैं।

एसडीएम अनिरुद्ध यादव ने भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच की जाएगी।

CLC कोचिंग सेंटर का यह मामला अब पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। कनीना हादसे के बाद भी यदि नियमों की अनदेखी जारी है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा संकेत है।

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