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नांगल चौधरी | लॉजिस्टिक हब भूमि विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा : किसानों की जमीन पर यथास्थिति के आदेश सरकार और किसानों की SLP पर होगी संयुक्त सुनवाई
नांगल चौधरी। महेंद्रगढ़ जिले में प्रस्तावित लॉजिस्टिक हब परियोजना से जुड़ा भूमि विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लगभग 150 एकड़ भूमि को लेकर पिछले आठ वर्षों से चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। किसानों द्वारा जमीन बेचने से इनकार किए जाने के बाद यह मामला लगातार राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए करीब 70 प्रतिशत भूमि उपलब्ध होने के बाद हरियाणा सरकार ने शेष भूमि प्राप्त करने के लिए एक विशेष अधिनियम लागू किया था। इस अधिनियम में प्रभावित किसानों को जमीन के बदले जमीन अथवा सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि देने का प्रावधान किया गया था।

इस अधिनियम को चुनौती देते हुए किसानों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के अधिनियम की वैधता को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि किसानों की भूमि का मूल्यांकन केंद्र सरकार के वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में निर्धारित मापदंडों के अनुसार किया जाए।
हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए सरकार ने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत गणना कर कुछ किसानों को नोटिस जारी किए। हालांकि प्रभावित किसानों ने इस गणना और मुआवजा निर्धारण पर असहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर दी। दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने भी हाईकोर्ट के निर्णय के कुछ प्रावधानों से असहमति व्यक्त करते हुए उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल की है।
अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। साथ ही याचिका में शामिल किसानों की भूमि के संबंध में अगली सुनवाई तक यथास्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखने के निर्देश जारी किए हैं।
सरकार का पक्ष है कि प्रारंभिक चरण में भूमि खरीद के समय जो कलेक्टर रेट और बाजार मूल्य था, उसी आधार पर वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के मापदंड लागू करते हुए लगभग 30 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर निर्धारित की गई थी। सरकार का दावा है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार की गई गणना भी लगभग इसी राशि के आसपास बैठती है।

वहीं प्रभावित किसानों का कहना है कि जब उनकी भूमि वर्तमान समय में ली जा रही है तो मुआवजा भी वर्तमान कलेक्टर रेट और बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाना चाहिए। किसानों का तर्क है कि लॉजिस्टिक हब परियोजना के विकास के साथ-साथ क्षेत्र में भूमि के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और नौ वर्षों की लंबी अवधि में जमीन के मूल्य में बड़ा बदलाव आया है।
अब इस बहुचर्चित भूमि विवाद में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है, जिस पर किसानों, स्थानीय लोगों और प्रशासन की निगाहें टिकी हुई हैं।
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