कनीना | भड़फ में चरित्र निर्माण शिविर का आगाज : भारत निर्माण युवा दल ने नशा मुक्त भारत का लिया संकल्प
कनीना | भारत निर्माण युवा दल हरियाणा की ओर से जिला के गांव भड़फ में चलने वाले सात दिवसीय चरित्र निर्माण एवं प्रशिक्षण शिविर का सोमवार को वैदिक परंपराओं के अनुसार शुभारंभ हुआ। दूसरे दिन मंगलवार का दिन भी बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक उत्थान को समर्पित रहा। श्रीमद भागवत सेवा आश्रम के […]

कनीना | भारत निर्माण युवा दल हरियाणा की ओर से जिला के गांव भड़फ में चलने वाले सात दिवसीय चरित्र निर्माण एवं प्रशिक्षण शिविर का सोमवार को वैदिक परंपराओं के अनुसार शुभारंभ हुआ। दूसरे दिन मंगलवार का दिन भी बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक उत्थान को समर्पित रहा।
श्रीमद भागवत सेवा आश्रम के स्वामी समर्पणानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित हवन-यज्ञ के साथ शुरू हुए इस शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का संचार करना है। इस कैंप में प्रदेश के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, नूंह और झज्जर जिलों से आए युवाओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

शिविर में लाठी चलाना सीखते युवा।
इस शिविर में वर्तमान में 50 विद्यार्थी, 20 वयस्क सहभागी और 10 प्रबंधन कार्यकर्ता सर्वांगीण विकास के इस कड़े अनुष्ठान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जहां उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक उत्थान पर विशेष बल दिया जा रहा है।
प्रतिदिन सुबह की शुरुआत योग, प्राणायाम और शारीरिक गतिविधियों से हो रही है, जिसके साथ ही युवाओं को आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जा रहे हैं ताकि वे आत्मनिर्भर और साहसी बन सकें।
भारत निर्माण युवा दल के संस्थापक अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह यादव ने इस अवसर पर युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि युवा पीढ़ी को सही दिशा और संस्कार मिल जाएं, तो वे राष्ट्र निर्माण के सबसे बड़े संवाहक बन सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के दुरुपयोग, नशे की बढ़ती लत और सांस्कृतिक मूल्यों से विमुख होने को आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती बताया।

शिविर में मौजूद युवाओं को संबोधित करते अभिमन्यु राव।
वहीं शिविर के वर्ग प्रमुख भगत सिंह कोठारी ने कहा कि भारत की महान ऋषि परंपरा और महापुरुषों का जीवन ही आज के भटके हुए युवाओं को सही मार्ग दिखा सकता है। इसी सोच के साथ शिविर में पारंपरिक जीवन पद्धति, ऋतु अनुकूल खान-पान और पारिवारिक मूल्यों पर गहन चर्चा की जा रही है।
डिजिटल युग की चुनौतियां और नशा मुक्त भारत का महासंकल्प
आधुनिकता के इस दौर में यह शिविर केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समसामयिक विषयों को भी बेहद बारीकी से शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि शिविरार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और सोशल मीडिया के सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं से रूबरू कराया जा रहा है, ताकि वे तकनीक का उपयोग रचनात्मक कार्यों और शोध के लिए कर सकें। इसके साथ ही साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर भी युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। बौद्धिक सत्रों के तहत व्याख्यान, समूह चर्चा, प्रश्नोत्तरी और व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न जिलों से आए युवाओं में आपसी संवाद और सामूहिक नेतृत्व की भावना को सुदृढ़ किया जा रहा है।
शिविर में मौजूद सभी विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों और प्रबंधकों ने नशीले पदार्थों, जंक फूड और अन्य हानिकारक वस्तुओं के सेवन से दूर रहने का सामूहिक संकल्प लिया।



